Satire

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    हिन्दुस्तानी के सबसे बड़े हास्य लेखक थे मुस्ताक अहमद यूसिफी – वीरेन्द्र जैन
    Posted in: श्रधांजलि

    हिन्दुस्तानी के सबसे बड़े हास्य लेखक थे मुस्ताक अहमद यूसिफी वीरेन्द्र जैन मैं अपने को हिन्दी हास्य व्यंग्य का ठीकठाक पाठक मानता हूं और उसके आधार पर कह सकता हूं कि उर्दू के लेखक मुस्ताक अहमद यूसिफी के बराबर का हास्य लेखक  अब तक मेरी नजरों से नहीं गुजरा। यह भी तब जब कि मैंने […]

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    निमकी मुखिया सीरियल दूसरा राग दरबारी है – वीरेन्द्र जैन
    Posted in: समीक्षा

    समीक्षा निमकी मुखिया सीरियल दूसरा राग दरबारी है वीरेन्द्र जैन हिन्दी टीवी चैनल स्टार भारत पर इन दिनों  ‘निमकी मुखिया’ नाम से एक सीरियल चल रहा है। इस सीरियल के लेखक निर्देशक है ज़मा हबीब जो वैसे तो थियेटर आर्टिस्ट से लेकर अनेक चर्चित भोजपुरी फिल्मों और सीरियलों के लेखक रहे हैं किंतु उक्त सीरियल […]

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    भुक्खड़ नहीं होते ईमानदार
    Posted in: व्यंग

    भुक्खड़ नहीं होते ईमानदार ——-अशोक मिश्र——– केजरी भाई लाख टके की बात कहते हैं। अगर आदमी भूखा रहेगा, तो ईमानदार कैसे रहेगा? भुक्खड़ आदमी ईमानदार हो सकता है भला। हो ही नहीं सकता। आप किसी तीन दिन के भूखे आदमी को जलेबी की रखवाली करने का जिम्मा सौंप दो। फिर देखो क्या होता है? पहले […]

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    सेल्फी वाला पत्रकार नहीं हूं
    Posted in: व्यंग

    ——-अशोक मिश्र——- घर पहुंचते ही मैंने अपने कपड़े उतारे और पैंट की जेब से मोबाइल निकालकर चारपाई पर पटक दिया। मोबाइल देखते ही घरैतिन की आंखों में चमक आ गई। दूसरे कमरे से बच्चे भी सिमट आए थे। घरैतिन ने मोबाइल फोन झपटकर उठा लिया और उसमें कुछ देखने लगीं। मोबाइल को इस तरह झपटता […]

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    रूसी भाषा में शपथ लूं, तो चलेगा?
    Posted in: व्यंग

    रूसी भाषा में शपथ लूं, तो चलेगा? —–अशोक मिश्र—— बंगाल में बड़े भाई को कहा जाता है दादा। ऐसा मैंने सुना है। उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में दादा पिताजी के बड़े भाई को कहते हैं। बड़े भाई के लिए शब्द ‘दद्दा’ प्रचलित है। समय, काल और परिस्थितियों के हिसाब से शब्दों के अर्थ बदलते […]

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    राजनीति के चीयरलीडर्स
    Posted in: व्यंग

    ——अशोक मिश्र——- आज सुबह स्पोट्र्स पेज पर छपी एक चियरलीडर की तस्वीर बड़े गौर से देख ही रहा था। तस्वीर थी भी इतनी मादक कि नजर पड़ते ही वहीं की वहीं ठिठक जाती थी। मैं तस्वीर की मादकता पर लहालोट हो ही रहा था कि बारह वर्षीय बेटे गॉटर प्रसाद ने सवाल दाग दिया, ‘पापा! […]

  • biahr
    मेढक तौलने की कवायद
    Posted in: व्यंग

    —–अशोक मिश्र—— आपने कभी मेढक को तुलते देखा है। एक तो बड़ी मशक्कत के बाद पकड़ में आता है। चलो, किसी तरह पकड़ में भी आ गया, तो उस पर काबू रखना तो और भी कठिन। इतना चिकना कि जरा सा हाथ ढीला पड़ा, तो फिसल जाता है। फिर उसे तौलने के लिए तराजू पर […]

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    धीरज रखो, सबका विकास होई
    Posted in: व्यंग

    —–अशोक मिश्र—— गांव पहुंचा, तो रास्ते में मिल गए मुसई काका। मैंने उन्हें देखते ही प्रणाम किया, तो उन्होंने किसी लोक लुभावन सरकार की तरह आशीर्वाद से लाद दिया। मैंने देखा कि  जिंदगी भर गटापारचा (प्लास्टिक) की चप्पल पहनने वाले मुसई काका स्पोट्र्स शूज पहने मुस्कुरा रहे हैं। मैंने मजाक करते हुए कहा, ‘नथईपुरवा तो […]

  • Onion
    कोहिनूर जैसा प्याज
    Posted in: व्यंग

    ——-अशोक मिश्र——— सन 2019 में भारत के किसी मोहल्ले का एक दृश्य। एक घर में मोहल्ले की चार-पांच महिलाएं बैठी पारंपरिक ढंग से गपिया रही हैं। गपियाने के लिए उन्हें न किसी मुद्दे की तरकार थी, न किसी किसी प्रसंग की। उनकी गपगोष्ठी तो राह चलते भी हो जाया करती थी। दो या तीन महिलाओं […]

  • Cartoon 02.07.2015
    अब तो भैंस भी हो जाएगी डिजिटल
    Posted in: व्यंग

    ——अशोक मिश्र—— नथईपुरवा गांव में लुंगाड़ा ब्रिगेड (फालतू किस्म के आवारा लड़के) परचून की दुकान के सामने बैठी बतकूचन कर रही थी। उनमें से एक के हाथ में उसी दिन का अखबार था। वह अटक-अटक कर अखबार की हेडलाइंस पढ़ता जा रहा था, ‘परधानमंतरी ने डिजि..टल इनडिया का किया उद..घाटन..। बोले, अब देश भर के […]

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