Social Media

  • Vadodara: Congress vice-president Rahul Gandhi addresses a public meeting during his road show at Karjan village in Vadodara on Tuesday. PTI Photo   (PTI10_10_2017_000070B)
    ब्रांड राहुल से बीजेपी में बढ़ती बेचैनी – जावेद अनीस
    Posted in: राजनीति

    ब्रांड राहुल से बीजेपी में बढ़ती बेचैनी —- जावेद अनीस —- सोशल मीडिया के इस दौर में राजनीति में नेता ब्रांडिंग और गढ़ी गयी छवियों के सहारे आगे बढ़ते हैं यहाँ ब्रांड ही विचार है और विज्ञापन सबसे बड़ा साधन, साल 2014 में नरेंद्र मोदी ने इसी बात को साबित किया था और अब राहुल […]

  • New Delhi:  People take part in a candle light vigil at India Gate in New Delhi on Wednesday against killing of journalist Gauri Lankesh.   PTI Photo by Kamal Kishore  (PTI9_6_2017_000200A)
    क्या बोली का जबाव गोली है ? – शैलेंद्र चौहान
    Posted in: असहिष्णुता, समाज

    क्या बोली का जबाव गोली है ? —– शैलेंद्र चौहान —– 5 सितंबर की रात कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में वरिष्ठ महिला पत्रकार गौरी लंकेश को उनके घर के बाहर ही कुछ अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस तरह से पत्रकार की हत्या पर मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में हंगामा […]

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    सोशल मीडिया पर भावनाओं का ज्वर – शैलेन्द्र चौहान
    Posted in: असहिष्णुता, समाज

    सोशल मीडिया पर भावनाओं का ज्वर —– शैलेन्द्र चौहान —– इन दिनों वर्तमान सरकार और विशेष रूप से प्रधानमन्त्री मोदी के विरुद्ध कोई मत प्रकट करने पर कुछ लोग फेसबुक या ट्विटर पर तुरत गाली-गलोज़ करने लगते हैं. असहमति इनके लिए शत्रुता से भी बढ़कर है. ये निसंदेह ऐसे लोग लगते हैं जो यह समझते हैं कि सोशल-मीडिया […]

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    छद्म राष्ट्रवाद का यह उन्मादी नक़ाब ! – शैलेन्द्र चौहान
    Posted in: समाज

    छद्म राष्ट्रवाद का यह उन्मादी नक़ाब ! —— शैलेन्द्र चौहान —— मौजूदा वक़्त में देश एक गहरे अनुदारवादी और अति-राष्ट्रवादी दौर से गुज़र रहा है। वैचारिक मतभेदों की परवाह किए बिना हर राजनीतिक दल भारत में मूढ़ता को बढ़ावा दे रहा है। राष्ट्रवाद एक उन्माद के पर्याय के रूप में परोसा जा रहा है। यह तो सर्वविदित है […]

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    जायरा वसीम का माफीनामा
    Posted in: समाज

    जायरा वसीम का माफीनामा —— अवधेश कुमार —— फिल्म दंगल में गीता फोगाट की भूमिका निभाने वाली जम्मू कश्मीर की जायरा वसीम के फेसबुक पेज पर माफीनामा पोस्ट देखकर या उसके बारे में सुनकर देश के वे सारे लोग हतप्रभ रह गए जो किसी के उसका प्रोफेशन चुनने की या किसी प्रकार की मान्य आजादी […]

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    मत-भिन्नता को मन-भिन्नता में बदलना, आज की राजनीति का घृणित स्वरुप
    Posted in: राजनीति, सांप्रदायिकता

    मत-भिन्नता को मन-भिन्नता में बदलना, आज की राजनीति का घृणित स्वरुप —– योगेन्द्र सिंह परिहार —— पारिवारिक, सामाजिक, धार्मिक एवं राजनैतिक क्षेत्र में कहीं न कहीं वैचारिक भिन्नता होती ही है और होना भी चाहिए क्योंकि विचारों के आदान-प्रदान से ही अच्छे विकल्प का रास्ता खुलता है। मेरे मन में हमेषा एक बात आती है […]

  • modi followers
    सेल्फीट विथ डाटर्स – एक सच
    Posted in: विशेष

    —–अलका गंगवार——- टि़वटर सेना के सेनानायक ने आज अपने टि़वटर सिपाहियों को आदेश दिया है कि वे नकारात्‍मक और अभद्र टिप्‍पणियों का रूखा जबाब न दिया करें, और सकारात्‍मक टिप्‍पणियां करें साथ में उन्‍होनें अपने समर्थकों को सोशल मीडिया का शालीनता से इस्‍तेमाल करने की नसीहत भी दी  है. टि़‍वटर सेनापती जो 2014 में यह […]

  • social media abuse
    चहचहाटों में बदलती अभिव्यक्ति की आज़ादी
    Posted in: समाज

    —वीरेन्द्र जैन— प्रेमचन्द ने आज से अस्सी साल पहले अपने एक लेख में लिखा था कि साम्प्रदायिकता राष्ट्रवाद का मुखौटा लगा कर आती है। सुप्रसिद्ध व्यंगकार हरिशंकर परसाई की लघुकथाओं और आर के लक्ष्मण के कार्टूनों ने इन्हीं जैसे  बहुत सारे मुखौटों को नोंचने का काम किया है। स्वार्थी तत्व समाज में मान्य आदर्शों की […]

  • एक ऐसा टोकेटिव प्लेटफार्म बन गया है, जिस पर  खुशी, गम, शोक आदि की नदी हमेशा बहती रहती है।
    ट्वीटर : मुझे भी कुछ कहना है…..
    Posted in: जीवन शैली, समाज

    – डॉ. महेश परिमल – माइक्रो ब्लाॅगिंग वेबसाइट ट्वीटर का बाेलबाला है। 140 शब्दों का यह खेल सोशल नेटवर्किंग पर लोकप्रिय बन चुका है। सेेलिब्रिटी वर्ल्ड पॉलिटिकल वर्ल्ड और हॉलीवुड-बॉलीवुड वाले ट्वीटर को अपने निजी जीवन का अंग समझने लगे हैं। यह एक ऐसा टोकेटिव प्लेटफार्म बन गया है, जिस पर  खुशी, गम, शोक आदि […]

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    सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से पसरता आतंकवाद
    Posted in: आंतंकवाद

    – डॉ. महेश परिमल – भारत में अपने पांव पसारता आतंकवाद के पीछे स्लीपर यूनिट्स जवाबदार है, ऐसा बार-बार कहा जाता है। पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद ऐसे स्लीपर यूनिट्स के कारण उसके हमले सफल हुए हैं, यह भी देखने में आया है। अब इस स्लीपर यूनिट्स नए स्वरूप में हमारे सामने आया है। प्रो. इस्लामिक स्टेट […]

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    यह संवेदनशीलता है या प्रहसन!
    Posted in: समाज

    –वरुण शैलेश- इसे चालबाजी कहें या संवेदनशीलता? सवाल कठिन है। इसे नए दौर का बाजारु उपभोक्तावाद नाम देकर हल्के में भी तो नहीं लिया जा सकता। लखनऊ के बाहरी इलाके में बर्बर बलात्कार कांड के बाद पीड़ित महिला की खून से लथपथ निर्वस्त्र लाश की तस्वीर सोशल मीडिया पर जिस तरह प्रसारित हुई उस पर […]

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