Society

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    हिंसक होते बच्चे: कहां गुम हो गया बचपन? – राघवेंद्र प्रसाद मिश्र
    Posted in: बच्चे, समाज

    हिंसक होते बच्चे: कहां गुम हो गया बचपन? — राघवेंद्र प्रसाद मिश्र — वर्तमान अच्छा होगा तभी सुरक्षित भविष्य की कल्पना की जा सकती है। बच्चे जो वर्तमान का भविष्य होते हैं आज उनकी क्रूरता देखकर यह अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि भविष्य खतरे में है। पिछले कुछ समय से देश के […]

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    उपभोक्तावादी संस्कृति के छलावे में भारतीय नारी – डाॅ0 गीता गुप्त
    Posted in: महिला, समाज

    उपभोक्तावादी संस्कृति के छलावे में भारतीय नारी —- डाॅ0 गीता गुप्त —- विगत दो दशकों से भारत में एक शब्द बहुत अधिक प्रचलन में है और वह है-उपभोक्तावादी संस्कृति। पता नहीं कब, कैसे, भारत में भी मनुष्य ‘उपभोक्ता‘ बन गया और गौरवमयी भारतीय संस्कृति उपभोक्तावादी संस्कृति में परिणत हो गई। और कुछ हो, न हो, […]

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    गैंग रेप, समस्याओं की जड़ों तक जाने की जरूरत – वीरेन्द्र जैन
    Posted in: समाज, सरकार

    गैंग रेप, समस्याओं की जड़ों तक जाने की जरूरत —- वीरेन्द्र जैन —- भोपाल की राजधानी के मध्य में सबसे प्रमुख स्थान के निकट एक 19 वर्षीय छात्रा के साथ गेंग रेप हुआ। उल्लेखनीय यह भी है कि छात्रा जिस पद के लिए कोचिंग कर रही थी उसमें सफल होने पर वह राज्य प्रशासनिक सेवा […]

  • An Indian farmer looks skyward as he sits in his field with wheat crop that was damaged in unseasonal rains and hailstorm at Darbeeji village, in the western Indian state of Rajasthan, Friday, March 20, 2015. Recent rainfall over large parts of northwest and central India has caused widespread damage to standing crops. (AP Photo/Deepak Sharma)
    भारत में किसानों की आत्महत्या – शैलेन्द्र चौहान
    Posted in: किसान, गरीबी, समाज

    भारत में किसानों की आत्महत्या —— शैलेन्द्र चौहान —— इक्कीसवी सदी का दूसरा दशक. यदि हम इस दशक पर दृष्टिपात करें तो  इस दशक में सदी की सबसे बड़ी घटना विकास दर के बजाय किसानों की आत्महत्या के दर में वृध्दि रही, और इससे बड़ा शर्मनाक पहलू यह है कि चुनावी मुद्दों की राजनीति में आकर्षण का केंद्र किसान है। […]

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    बंगलरु छेड़छाड़ मामला – सामाजिक विविधिता में छुपे बीज
    Posted in: समाज

    बंगलरु छेड़छाड़ मामला – सामाजिक विविधिता में छुपे बीज ——- वीरेन्द्र जैन ——- आज से लगभग पचास साल पहले कलकत्ता [आज का कोलकता] के रवीन्द्र सरोवर में आयोजित किसी बड़े मनोरंजन कार्यक्रम के दौरान अचानक ही बिजली चली गयी थी जिसके बाद वहाँ उपस्थित कुछ पुरुष महिलाओं पर जंगलियों की तरह टूट पड़े थे और […]

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    आखिर क्यों नहीं बदलती महिलाओं की दशा?
    Posted in: महिला, समाज

    ——-जगजीत शर्मा——– बीड :16 साल तक बेटी से रेप करने वाला पिता गिरफ्तार, दो बार किया गर्भवती। इंदौर : बेटी के साथ सौतेले पिता ने किया कथित रेप। गोवा : 10-वर्षीय बेटी के साथ कथित रेप, आरोपी पिता गिरफ्तार। मंदसौर: पिता ने एक वर्ष तक किया दस वर्षीय पुत्री से दुष्कर्म। ये अखबारों में छपी […]

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    धर्म, राजनीति और समाज
    Posted in: समाज

    —राम पुनियानी— धर्म का राजनीति से क्या लेनादेना है? धर्म और हिंसा का क्या संबंध है? वर्तमान समय में, विभिन्न राजनैतिक एजेण्डे कौनसा रूप धर कर हमारे सामने आ रहे हैं? ऐसा लगता है कि राजनीति ने धर्म का चोला ओड़ लिया है और यह प्रवृत्ति दक्षिण व पश्चिम एशिया में अधिक नजर आती है। […]

  • KAREENA__SAIF
    हिन्दू-मुस्लिम विवाह जेहाद नहीं, असली भारत है.
    Posted in: धर्म, समाज

    -सैफ अली खान – मैं एक खिलाड़ी का बेटा हूँ। मैं इंग्लैंड, भोपाल, पटौदी, दिल्ली और मुंबई में पला-बढ़ा हूँ और जिन भी हिन्दू या मुसमानों को जानता हूँ, उनसे कहीं ज्यादा भारतीय हूँ, क्योंकि मैं हिन्दू और मुसलमान दोनों हूँ। मैंने यह लेख लोगों पर अथवा भारत और यहाँ के गांवों में सांप्रदायिकता की समस्याओं पर टिप्पणी करने के लिए नहीं लिखा बल्कि यह एक ऐसा मुद्दा […]

  • India's-safest-unsafe-cities-women-45
    जब कफ्र्यू लगा सिर्फ पुरूषों के लिए
    Posted in: महिला, समाज

    – अंजलि सिन्हा – आप इस हक़ीकत से परिचित ही हैं कि हमारे समाज में महिलाओं के लिए रातों में अघोषित कर्यू होता है। रात ढलने के साथ साथ सार्वजनिक वाहनों से लेकर सड़कों तक में अकेली महिलाओं का मिलना कम से कम होता जाता है। समय समय पर हम इसका प्रतिकार भी देखते हैं। […]

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    धर्म परिवर्तन की राजनीति और अम्बेडकर
    Posted in: जीवन शैली, धर्म, राजनीति, समाज

    -वीरेन्द्र जैन – प्रेम विवाह भी अंततः विवाह ही होता है और उसमें भी परम्परागत विवाह की तरह कभी कभी टूटन पैदा हो जाती है। जब ऐसी टूटन अंतर्धार्मिक विवाहों के बीच आती है तो धर्म के आधार पर राजनीति करने वाले इसे धर्म परिवर्तन से जोड़ने लगते हैं ताकि एक सम्प्रदाय की भावनाओं को […]

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